कोविड 19 और कोविड 786 से दोतरफा संघर्ष मे उलझा भारत।

कल रात दूरदर्शन पर चानक्य सीरीयल पर कैकय के हाथो तक्छ्शिला के पतन का एपिसोड देखा. कैसे पूरे तक्छ्शिला मे कैकय के अंडरकवर एजेंट और हथियार रहते है. कैसे प्रमुख लोगो को गाफिल रखा जाता है ताकि जनता भी गाफिल रहे और जनता गाफिल रही. कुछ लोगो को लालच से और कुछ लोगो को नारी से कब्जे मे कर लिया जाता है और आक्रमण के समय कैसे अंदर के एजेंट अंदर अफरातफरी मचाते है और बाहर से सेना आकर आसानी से कब्जा कर लेती है.  यह दृश्य देखकर और आज के भारत की स्तिथि देखकर, आज कितनी गम्भीर परिस्तिथी है, इसका हमे अनुमान लगाना चाहिये. ये सब सन्योग है ऐसा सोचकर हम, लोगो को बैठना नही चाहिये. इश्वर करे ये सब सन्योग हो, किंतु हमे यथार्थवादी भी होना चाहिये और सब कडियो को जोड्कर पूरी तस्वीरको देखने का प्रयत्न भी  करना चाहिये नही तो हम भी कही के नही रहेंगे.

चीन मे एक हिस्से मे वायरस फैलता है और फिर उसी हिस्से मे सीमित रह जाता है. चीन के पास विशाल अस्थाई अस्पताल बनाने के सारे संसाधन मौजूद रहते है और चीन तुरंत वे अस्पताल बनाता भी है. चीन के पास बडी मात्रा मे( सामान्य तौर पर रहने वाले स्टाक कही ज्यादा, निर्यात करने के लायक) बचाव के उपकरण निर्यात को तैयार है. कुछ लोग  मारे जाते है किंतु कम्युनिष्टो ने कब कुछ जानो की परवाह की है, थियेनआनमन चौक से लेकर कम्बोडिया तक और मास्को की सडको (लेनिन और स्टालिन के समय मे) से लेकर क्युबा तक.कम्युनिष्ट नेता पूंजीवादि नेताओ से कही ज्यादा  बडे दानव है.

भारत अपनी सक्रियता ( चीन से और दुनिया से लोगो को समय पर निकाल कर, सेना और अर्धसैनिक बलो के नियंत्रण मे क्वारंटीन कर ताकि ढील की कोई गुंजाईश नही रहे, पोजिटिव लोगो का इलाज़ कर) पहले फेज से अपने को बचा लेता है. अब ये भारत के सेक्युलर जमात के नेताओ को कहा पचता है, लिहाजा जेहादियो से मिलकर रणनीति बनाई जाती है. जब भारत अपने बचाव की तैयारी कर रहा होता है तब दिल्ली के निजामुद्दीन मे हज़ारो लोग बुलाये जाते है. मरकज का मुख्यालय तो उत्तर प्रदेश मे है किंतु दुर्भाग्य से वहा तो योगी बैठे है अतह दिल्ली और महाराष्ट्र  मे लोग बुलाये जाते है. आशा थी कि उद्धव ठाकरे दबाव मे षडयंत्र को चलने देंगे किंतु उद्धव फिर भी शुरुआत मे अनुमति देने के बाद अपना भला बुरा सोचकर, अंत समय मे अनुमति वापस ले लेते है. दिल्ली मे लोग तैयार किये जाते है कि नवरात्री के मेलो ठेलो मे जेहादी कोरोना बांटेंगे और फलो पर भी वाईरस थूक से लगा कर बेचना है क्युंकि नवरात्री को बच्चिया और बूढी औरते सामान्यतह मंदिरो मे ज्यादा जाती है, जेहादियो को अपना थूक रेलिंग और डोर लाक्स पर लगाना है,ऐसी ट्रैनिंग दी जाती है, इस आशा मे कि मोदी नवरात्री मे लोकडाउन लगाने का साहस नही करेंगे और भारत मे हिंदुओ को तबाह करेंगे और लोग पूरे भारत मे पहुचा दिये जाते है और थोडे दिल्ली मे रखे जाते है, किंतु मोदी फिर भी अचानक ऐसा कर देते है ( कांग्रेसियो की ईटैलियन मम्मी की पीडा को समझे, जो कि कह रही है कि लोकडाउन अचानक लगाया,तैयारी नही की, सलाह नही की, ताकि आपकी तैयारी को पलीता ना लगता, आप दूसरी रननीति बना पाती ),और तो और  मोदी जनता  कर्फ्यु जैसे शब्द गढकर और शाम को जनता ताली बजवाकर इन सारे नेताओ की जमात को दिखा देते है कि जनता किसके साथ  है किंतु सेक्युलर नेता कैसे हार माने, तो फिर प्रवासी मजदूरो मे अफवाह फैलाकर और दिल्ली की महानगर बस  सेवा को दो दिन चलाकर लोगो को आनद विहार और यूपी की सीमा पर इकठ्ठा कर दिया जाता है ताकि मरकजके बचे हुए जमाती इस भीड का हिस्सा बन कर कोरोना फैलाते हुए भारत के विभिन्न हिस्सो मे पहुच जाय और स्तिथी बेकाबू हो जाय, किंतु दिल्ली पुलिस  तो केंद्र के अधिकार मे है अतह निजामुद्दीन सील कर दिया जाता है और ये योजना फेल हो जाती है किंतु फिर भी कुछ  जेहादी अपने मंसूबो मे कामयाब हो जाते है. एक व्यक्ति 400 लोगो मे कोरोना फैला सकता है तो ये ढाई हज़ार जेहादी कितनी तबाही फैला सकते है या थे, आप स्वयम अंदाज़ा लगाये.

अतह मुझे लगता कि हम सब इस बारे मे ज्यादा से ज्यादा लोगोसे चर्चा करे और हम सब सरकार से इस बात की मांग करे कि भारत सरकार और विश्व की अन्य सरकारो ( चीनके षडयंत्र के परिप्रेछ्य मे) को इस पूरे प्रकरण की अच्छे से जांच करानी चाहिये और जिससे दोषी समाज और दुनिया के सामने लाये जा सके और उन्हे कडी से कडी सजा दी जा सके.

विनय ना मानत जलधि जड, गये तीन दिन बीत !

बोले राम सकोप तब, भय बिन होये ना प्रीत !!

रामायण सीरियल चल रहा है, आपने रामायण पढी भी है और फिर भी बाते हो रही है कि समुदाय विशेष से सब्जी न खरीदने वाले दोषी है और भारत की कोरोना से लडाई को मुश्किलतर बनाने वालो के खिलाफ कोई शब्द नही और जो लोग निंदा कर रहे है और इन कुकृत्यो की निंदा होनी भी चाहिये, पर कहा जा रहा है कि इसे साम्प्रदायिक रंग दिया जा रहा है, क्या बकवास है. अरे हमे तो छोडिये, राम जैसे पुरुषोत्तम भी तीन दिन तक वरुण से प्रार्थना करते रहे किंतु समय व्यर्थ. जैसे ही धनुष उनके हाथ मे आया, वरुण उपाय सहित बाहर आ गया. आप मेरे वरिष्ठ है किंतु समुदाय विशेष के लिये आपकी प्रीत मेरी समझ से बाहर है. चलिये मैं आपको उदाहरण सहित समझाता हूँ, ये अब्दुल से लोगो को सब्जी क्यु नही खरीदनी चाहिये?

.           ये भोला अब्दुल हमे सब्जी बेचकर दो हज़ार रुपये कमाता है, और शाम को मौलवी साहब के पास जाता है और मौलवी साहब उससे कहते है कि ये कमाई और बरकत उसे अल्लाह ने दी है इसिलिये 500 रुपये मदरसा के लिये दे दो. अब्दुला को कोई बच्चे की फीस तो देनी नही है क्युंकि अल्लाह ने मुह दिया है तो वो निवाला भी देगा इसिलिये काफिरो के स्कूल नही जाना है. ये 500 रुपये से जो मदरसा बनेगा या चल रहा है वो चार बाते अनिवार्य रूप से सिखाता है.

  1. दुनिया मे अगर किसी जगह शिर्क है या कुफ्र है, या इत्तिदाद (कोई इस्लाम छोड दे) होगा तो उसकी सजा मौत है और ये सजा हमे देने का हक है.
  2. दुनिया मे गैर मुस्लिम्स केवल शाषित होने के लिये है और केवल मुस्लिमो को हुक़ूमत करने का हक है. कोई भी गैर मुस्लिम हुकूमत नाजायज है और जब हम ताक़त पा लेगे तो उस हूकूमत को उलट देंगे इसिलिये गैर मुस्लिम हूकूमतो मे गडबडिया फैलाते रहो, जब तक कि तुम इतने ताकतवर न हो जाओ कि उस हूकूमत को उखाड फेको.
  3. दुनिया मे मुसलमानो की एक ही हूकूमत होनी चाहिये, खलीफा की, जिसे खिलाफा कहते है( और ये खिलाफा का नमूना हमे आई एस आई एस ने जल्द ही मे दिखाया है, और भी दिखाया कि कैसे दुनिया भर पढे लिखे मुसलमान खिलाफा के लिये इकठ्ठे हुए थे.)
  4. कौमी रियासते (जैसे ब्रिटिश, भारतीय या पाकिस्तानी भी) कुफ है और इनकी इस्लाम मे कोई गुंजाईश नही.

 

अब इस मदरसे से निकल कर जो आयेगा,वो क्या बम नही फोडेगा. अहमदाबाद मे ये बम विस्फोट मैं स्वयम भुगत चुका हूँ और गनीमत जानिये कि अब भाजपा हूकूमत है और इसिलिये आप बेखौफ जी रहे है. सुन्नी वहाबी इस्लाम के तीनो सबसे बडे वैचारिक केंद्र देवबंद (देवबंदी), बरेली( बरेलवी)  और कांधला ( तबलीगी ) हमारे उत्तर प्रदेश मे ही है. अरे! मुरीदके, बालाकोट, रायविंड आदि ( पाकिस्तान वाले) आतंकवादियो के केंद्र तो इनके ही बच्चे है. इन्ही तीन जगहो के मौलवी ही कश्मीर और देश और दुनिया के बाकि हिस्सो मे आतंकवाद  पैदा कर रहे है और इन और इन जैसे केंद्रो को ये भोला अब्दुल ही चलाता है क्युंकि उसे रोटी रामलाल नही देता, जो उससे सब्जी खरीदता है बल्कि उसे रोटी अल्लाह देता है. इसीलिये अब्दुल को ये बताना जरूरी है कि, रोटी तो बेटा युझे रामलाल से ही मिलती है. जब तक अब्दुल का पेट भरा रहेगा, उसे केवल मौलवी साहब और अल्लाह ही दिखेंगे. जब भूख लगेगी तभी उसे रामलाल याद आयेगा. नही तो अब्दुल काफिरो को काटने के लिये तलवार खरीद कर घर मे रखता रहेगा.

और अब्दुल की इस जाहिलियत से क्या नुकसान होता है, एक आध उदाहरण उसका भी ले. मेरे गाव मे भी कोरोना से बचने के लिये अल्लाह का कवच आया था और हमारा हिंदु बहुल गाव होते हुए भी एक आध के घर के बाहर चिपका, जिसे हम लोगो ने धमका कर फाड दिया और इन लोगो को लाईन पर चलने को बाध्य किया नही तो हमारे यहा भी ये भोले अब्दुल ये अल्लह का कवच लगा के लोगो को कोरोना बांट रहे होते.

आगे आर्थिक तौर पर हमे क्या नुकसान होता है. अब्दुल के सारे बच्चे सरकारी सब्सिडी का इस्तेमाल करते है और करते रहेंगे, क्युंकि वे पढेंगे तो नही, तो हमारा देश तरक्की कैसे करेगा. अरे पढने के संस्थान ही किसी राष्ट्र की समृद्धि का आधार होते है, इन जाहिलो ने ही हमारे विश्वप्रसिद्ध विश्वविद्ध्यालयो ( नालंदा, तकछ्शिला आदि) को ही नही पूर्व मे तोडा है बल्कि दुनिया मे जहा जहा इनका बस चला, इन लोगो ने ज्ञान के मंदिरो को तोडा है. मिश्र मे अलेक्जेंड्रिया इसका उदाहरण है, जहा सिकंदर ने भारत से विद्वानो को लाकर बडी बडी युनिवर्सिटिया खडी की थी और वो जगह पश्चिम मे ज्ञान का सबसे बडा केंद्र तभी तक रही जब तक मुसलमानो के हाथ मे मिश्र नही आया. पश्चिम इस वजह से हमसे आगे निकल गया क्युंकि उसने सोलहवी सदी मे छापेखाने का अविष्कार कर लिया था और ज्ञान को सर्वसुलभ कर दिया जबकि हमारे यहा तब हमारे विश्वविद्ध्यालय ये जाहिल तोड रहे थे. छापाखाना की तकनीक भारत आ जाती किंतु बीच मे खलीफा बैठा था, जिसने छापाखाना को कुफ्र करार देकर पूरे मुस्लिम विश्व (और दुर्भाग्य से तब हमारे यहा इस्लामी शाषन था) के लिये बैन कर दिया, और पश्चिम हमसे आगे निकल गया.

अब इस जाहिलियत का एक सामाजिक उदाहरण भी ले. मेरठ का एक रिक्शावाला दिल्ली मे रिक्शा चलाता था. घर पर उसका बाप और बीबी बच्चे रहते थे.  बाप ने बीबी का बलात्कार किया. बीबी मौलवी साहब के पास गयी तो मौलवी साहब ने न्याय किया कि अब तुम अपने शौहर की अम्मी हो और तुम्हारा ससुर तुम्हारा शौहर. कारण था कि पैगम्बर मुहम्मद ने जब अपने लडके की बीबी से अंधेरे की वजह से जिस्मानी रिश्ता कायम कर लिया था तब वो हजरत मुहम्मद की बीबी हो गयी थी, इसिलिये इस घटना की रोशनी मे बलात्कारी ससुर अब उसका शौहर. जब रिक्शावाला घर आया तो पत्नी ने उसे सारा किस्सा बताया तो वो मौलवी के निर्णय के खिलाफ देवबंद पहुचा तो देवबंद ने भी स्थानीय मस्जिद के मौलवी के निर्णय को सही ठहराया. फिर रिक्शावाला तो इस निर्णय को मान गया किंतु उसकी पत्नी एक एन जी ओ के पास पहुच गयी और फिर ससुर के खिलाफ मुकदमा हुआ और उस पीडिता को अपना शौहर वापस मिला किंतु इन जाहिलो ने उन्हे, देवबंद का फतवा न मानने के विरोध मे मेरठ मे नही रहने दिया और वो परिवार दिल्ली चला गया. अब कही अब्दुल की वजह से ये गंदगी मथुरादास के मन मे नही आ जाये अतह अब्द्ल को समझाना जरूरी है किंतु फिर वही (विनय न मानत….). आप सब जानते है कि भारत मे बलात्कार इन मुस्लिमो के साथ ही आया है, मुस्लिम शाषको से पहले हमे इसका भारत मे उदाहरण नही मिलता है. अरे भारत मे तो नारी की मर्यादा को भंग करने पर मृत्यु दंड मिलता है, राम ने रावण और बाली को दिया तो कृष्ण ने दुशाषन को. इनके यहा ही पैगम्बर को नारी की मर्यादा भंग करने पर पुरुष्कार मे वो नारी मिल गयी. अगर अब्दुल अपने पूर्वज राम को मानने लगेगा तो फिर वो भी बलात्कारकरने से डरेगा. कुकर्म करने से डरेगा.

युरोप मे पोलैंड ने कोई मुस्लिम नही और कोई मस्जिद नही का पालन किया. आज वहा न आतंकवाद है ना कोरोना का खौफ जबकि पूरा युरोप तबाह है. जापान मे आतंकवाद नही क्युंकि वहा मुस्लिम नही. बर्मा ने जब रोहिंग्याओ को भगा दिया तो उनके यहा से भी आतंकवाद चला गया. हिंदु बडे भाई है, ऐसा ये कहते है तो ठीक, कभी कभी बडो को बच्चो को सही करने को सजा देनी पडती है, भूखा रखा जाता है. हमारे आपके साथ बचपन मे ऐसा हो चुका है तो फिर इन भोले छोटे भाईयो को थोडी सजा देने का समय आ गया है ताकि ये सम्भले, क्युंकि इन्हे तो इनके भले की खबर नही, तो फिर हम बडो को ही तो इन्हे सुधारना पडेगा, नही तो फिर हम ही मुश्किल मे पड जायेंगे. आफगानिस्तान मे पडे, पाकिस्तान मे पडे, कश्मीर मे पडे, और आज नही चेते तो यहा भी पडेंगे.अब्दुल अपनी ढिठाई सी ए ए पर दिखा चुका है, कोरोना पर दिखा रहा है, अतह अब उसे दंडित करने का समय है

 

स्वदेशी चिंतक व कार्यकर्ता – नूतन चतुर्वेदी (9721012136)