पीएम मोदी के भाषण से मिले संकेत, कृषि कानून पर बैकफुट पर नहीं आएगी सरकार

नए कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब और हरियाणा के किसान दिल्‍ली बॉर्डर पर चार दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं. किसानों ने दिल्ली का रास्ता बंद करने की चेतावनी दी है. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में लोगों को संबोधित करते हुए कृषि कानूनों पर विस्तार से बात रखते हुए किसानों को भ्रमित करने वाले लोगों से सवाधान रहने को कहा है. पीएम मोदी के भाषणों से मिले संकेत से साफ है कि सरकार न तो वह किसान आंदोलन के आगे झुकेगी और न ही कृषि कानून पर बैकफुट पर आएगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछले कुछ समय से एक अलग ही ट्रेंड देश में देखने को मिल रहा है. पहले अगर सरकार का कोई फैसला पसंद नहीं आता था तो विरोध होता था, लेकिन अब विरोध का आधार फैसला नहीं बल्कि भ्रम फैलाया जाता है. दुष्प्रचार किया जाता है कि फैसला तो ठीक है लेकिन इससे आगे चलकर ऐसा हो सकता है. जो अभी हुआ ही नहीं, जो कभी होगा ही नहीं, उसको लेकर समाज में भ्रम फैलाया जाता है. ये वही लोग हैं जिन्होंने दशकों तक किसानों के साथ लगातार छल किया है.

पीएम मोदी ने कहा कि किसान को आधुनिक सुविधाएं देना, छोटे किसानों को संगठित करके उन्हें ताकतवर बनाना और किसानों को मजबूत करने का प्रयास किए जा रहे हैं. फसल बीमा हो या सिंचाई, बीज हो या बाजार, हर स्तर पर काम किया गया है. किसान हित में किए गए कृषि सुधार ऐसे ही विकल्प किसान को देते हैं. अगर किसान को कोई ऐसा ही खरीदार मिल जाए जो सीधा खेत से फसल उठाए तो क्या किसान को अपनी उपज उसे बेचने की आजादी मिलनी चाहिए कि नहीं.

किसान को भरोसा दिलाते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत के कृषि उत्पाद पूरी दुनिया में मशहूर हैं. क्या किसान की इस बड़े मार्केट और ज्यादा दाम तक पहुंच नहीं होनी चाहिए? मोदी ने कहा कि नए कृषि कानून किसानों के लिए विकल्प, पुराने में कोई बदलाव नहीं. अगर कोई पुराने सिस्टम से लेनदेन को उचित समझता है तो इस कानून में कोई रोक नहीं लगाई गई है. नए कृषि सुधारों से नई विकल्प और नए कानूनी और संरक्षण दिए गए हैं. किसानों को नाम पर पहले की सरकारों ने छल किया है.

उन्होंने कहा कि पहले मंडी के बाहर हुए लेनदेन ही गैरकानूनी थे. ऐसे में छोटे किसानों के साथ धोखा होता था, विवाद होता था. अब छोटा किसान भी मंडी से बाहर हुए हर सौदे को लेकर कानूनी कार्यवाही कर सकता है. किसान को अब नए विकल्प भी मिले हैं और धोखे से कानूनी संरक्षण भी मिला है. सरकारें नीतियां बनाती हैं, कानून-कायदे बनाती हैं. नीतियों और कानूनों को समर्थन भी मिलता है तो कुछ सवाल भी स्वभाविक ही है. ये लोकतंत्र का हिस्सा है और भारत में ये जीवंत परंपरा रही है. पीएम मोदी ने कहा कि पहले वोट के लिए वादा और फिर छल. यही लंबे समय तक देश में चलता रहा है, जब इतिहास छल का रहा हो तब दो बातें काफी स्वाभाविक है, पहली ये किसान अगर सरकार की बातों से आशंकित रहता है तो इसके पीछे दशकों तक का लंबा छल का इतिहास है. पीएम ने कहा कि जिन्होंने वादे तोड़े, छल किया, उनके लिए ये झूठ फैलाना एक तरह से आदत और मजबूरी बन गई है, क्योंकि उन्होंने ऐसा ही किया था.