सिढ़पुरा/कासगंज (उ.प्र.) : थाना परिसर के पुलिस क्वाटर में ही कराया जा रहा है नाजायज तमंचों का निर्माण।

जुआ सट्टेबाजी नकली शराब के कारोबार मे थाना पुलिस कर रही है लाखों के बारे न्यारे*

कासगंज। थाना सिढपुरा क्षेत्र के अंतर्गत सरकार व सरकार के कानून से पुलिस द्वारा खिलवाड़ करना मामूली घटना माना जाता है। क्योंकि इस थाना तैनात एक पुराने तथा अपराधिक गतिविधियों को संचालित करने एवं कराने में मास्टरमाइंड कहे जानेवाले दीवान जी का इस थाने में डंका बजता है। इसी सख्शियत की दम पर थाना परिसर तथा थाना क्षेत्र के अंतर्गत अवैध शस्त्रों का निर्माण होना तथा जुआ सट्टा शराब के काले कारनामे कहीं भी देखे जा सकते हैं।

चर्चा है कि दीवान जी का डंका वजना निराधार नहीं है, वह प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्वघोषित रिश्तेदार जो ठहरे? यही कारण है कि थाना अध्यक्ष से लेकर पुलिस विभाग के अन्य आला अधिकारियों में भी इन दीवान जी के खिलाफ कलम अथवा जुबान चलाने की हिम्मत शेष नहीं बची है।

इस समाचार के साथ सबूत के तौर पर कुछ फोटो प्रकाशित किये जा रहे हैं, जिनमें पुष्पेंद्र दीवान जी अपने पुलिस क्वार्टर मे ही तमंचा बनवा रहे है। और वनियान पहने तख्तपर बैठकर मोर्चा सम्हाले हुए अच्छे बुरे निर्माणाधीन शस्त्रों का आंकलन एवं निरीक्षण कर रहे हैं। वहीं तमंचे बनाने बाला कारीगर अभयजीत पुत्र रामिकिशोर निवासी ग्राम परौली थाना जैथरा जनपद एटा बने अधबने शस्त्रों को दीवान से को दिखा – दिखा कर पास करवा रहा है। पास मे रखे है बने हुए कई तमंचे यह शस्त्र कुछ दिन पूर्व ही तैयार कराये गये हैं कारोबार लगातार जारी है। क्या यह कारोबार जुर्म है? यदि हां – तो कार्यवाही होगी, या इस तरह के अपराध करने और कराने की कुछ चुनिंदा पुलिसकर्मियों को योगी सरकार से छूट प्राप्त है? कही ऐसा तो नहीं कि सरकार की आंखों से ओझल इस प्रकार के स्वघोषित पुलिसिया बर्दीधारी सरकार के तथाकथित रिस्तेदार अन्दर ही अन्दर सरकार की कवर खोदने मे जुटे हों?परिस्थिति चाहे जो हों न्यायहित मे अबिलम्ब ही कानून से खिलवाड़ करने वाले इस अवैध गोरखधन्धे बाजों के काले कारनामों से पर्दा उठना बहुत जरूरी है।

जन चर्चा के अनुसार उक्त थाना क्षेत्र के समूचे इलाके में इस समय जुआ – सट्टा – नशीले पदार्थों की तस्करी – अवैध शस्त्रों का खुलेआम निर्माण, कराने जैसे काले कारनामों का आधिपत्य कायम हो गया है।

सूत्रों की माने तो इस थाना पुलिस की देखरेख तथा संरक्षण में कराए जा रहे अवैध शस्त्रों की सप्लाई गैर जनपदों में ऑर्डर के हिसाब से की जाती है। यह संबंधित दीवान जी की लाठी में ही दम है कि वह अवैध शस्त्र, तमंचा, राइफल, बंदूक बनाने वाले कारीगरों को दूसरे थाना क्षेत्रों से भी जब चाहे तब उठवा लेते हैं, और फिर उन्हीं तमंचा बनाने बालों से थाना परिसर मे स्थिति अपने पुलिस क्वार्टर में ही खुलेआम शस्त्रों का निर्माण करा कर इस अवैध कारोबार के जरिए लाखों के बारे न्यारी करने में लंबे समय से सफल बने हुए हैं।

ऐसा नहीं है कि थाना सिढपुरा के आला अधिकारियों की नाक के नीचे हो रहे इस कानून से खिलवाड़ करने वाले गोरखधंधे तथा अवैध शस्त्रों की फैक्ट्री संचालित होने की जानकारी ना हो। यह बात अलग है कि वह जानबूझकर भी मौन धारण किए हुए हैं, मजबूरी चाहे हिस्सेदारी की हो या फिर मुख्यमंत्री के स्वघोषित पुलिस दीवान के दबदबा की।

यहां पर यह भी उल्लेखनीय है कि थाना के चर्चित एवं दबंग तथा अपराधिक गतिविधियों के संचालक वर्दीधारी दीवान जी के विरुद्ध जिसने भी जुवान खोली चाहे वह विभाग से जुड़ा हुआ व्यक्ति हो, अथवा क्षेत्र में रहने वाला आम सामान्य नागरिक, वह दीवान जी के दंड से बच नहीं सका है। और इसी भय के चलते थाना परिसर और पूरे इलाके में दीवान जी के भय का जादू कायम है। जिसकी वजह से कोई जुबान हिलाने की जुर्रत नहीं कर सकता।