हादसे तो होते रहते हैं, लेकिन कुछ ऐसे होते हैं, जो लंबे समय तक गहरा जख्म दे जाते हैं। किन्तु अफसोस इस बात का प्रशासन धनउगाही करने के लिए कुछ माह में ही बड़े बड़े हादसे भूल जाता है। कार्रवाई तो बहुत दूर की बात है। 2020 साल के आरंभ में कन्नौज के जीटी रोड पर घिलोई गांव के समीप ट्रक से टक्कर के बाद फर्रुखाबाद से जयपुर जा रही स्लीपर बस आग का गोला बन गई थी, जिसमें दस लोगों की जिदा जलने से मौत हो गई थी। आज भी लोग इस घटना को याद कर सिहर जाते हैं।
शाम होते ही बसअड्डा व टैम्पो अड्डो के आस-पास फर्रूखाबाद-शमसाबाद-कायमगंज से दिल्ली व जयपुर जाने वालों के लिए कई डबल डेकर बसे सड़क पर फर्राटे से दौड़ रही हैं। इससे राजस्व को तो चूना लग ही रहा है लेकिन प्रशासन की भी बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। कहीं धनउगाही करने वाला प्रशासन फिर किसी अनहोनी की प्रतिक्षा तो नहीं कर रहा है।
आपको याद होगा कि दस जनवरी को नए साल का जश्न खत्म भी नहीं हुआ था कि छिबरामऊ क्षेत्र के घिलोई गांव के समीप जीटी रोड पर हुए बस हादसे में दस लोग जिदा जल गए थे, जिनकी पहचान डीएनए रिपोर्ट से हुई थी। 2020 साल का यह सबसे भीषण हादसा था। हालांकि इसके बाद भी आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर कई हादसे हुए, लेकिन यह सबसे बड़ा था। इसमें एक परिवार तो पूरा ही खत्म हो गया था। परिवहन विभाग और पुलिस ने बस मालिक पर शिकंजा कसा और तमाम तरह की खामियां और लापरवाही सामने आईं, लेकिन कार्रवाई का नतीजा सिफर ही रहा।
मोदी-योगी ने भी जताया था गहरा दुख
घिलोई बस हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गृहमंत्री अमित शाह तथा रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष लल्लू सिंह समेत कई नेताओं ने ट्वीट कर गहरा दुख जताया था। मुख्यमंत्री ने तो अगले दिन कैबिनेट मंत्री रामनरेश अग्निहोत्री को भेजकर मृतकों के स्वजन तथा घायलों को आर्थिक सहायता दिलाई थी। जिसमें आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया जा चुका है।